भाईदूज bhaiduj और चित्रगुप्त पूजन, कलम दवात पूजन आज, आइये जाने विस्तार से-

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। आज भाई-बहन के प्यार का प्रतीक भइया दूज का त्योहार है । साथ ही साथ इस दिन को चित्रगुप्त पूजन के रूप में भी मनाया जाता है। कलम दवात पूजा भी आज करते हैं। आज के दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगा कर भाई के कल्याण की कामना करती है, साथ ही भाई अपनी बहन को कुछ उपहार देता है। आज भाई को अपनी बहन के घर पर भोजन करना चाहिए । पद्मपुराण के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन अपनी बहन के घर भोजन करता है, वो साल भर किसी झगड़े में नहीं पड़ता और उसे शत्रुओं का भय नहीं होता है, यानि हर तरह के संकट से भाई को छुटकारा मिलता है। जानिए भाई दूज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

भाई दूज का शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त है – सुबह 6:45 से 8:05 ,

दूसरा मुहूर्त- सुबह 9:25 से 10:45
तीसरा मुहूर्त- दोपहर बाद 1:26 से शाम 7:07 तक

ऋगवेद में वर्णन है कि यमुना ने भी अपने भाई यम को इस दिन खाने पर बुलाया था, इसीलिए इस दिन को यम द्वितिया के नाम से भी जाना जाता है ।

भाई दूज के दिन बहनें इस तरह करें पूजा
भाईदूज के दिन सभी बहनें सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें। इस थाली में रोली, चावल, मिठाई, नारियल, घी का दीया, सिर ढकने के लिए रूमाल आदि रखें | इसके साथ ही घर के आंगन में आटे या चावल से एक चौकोर आकृति बनाएं और गोबर से बिल्कुल छोटे-छोटे उपले बनाकर उसके चारों कोनों पर रखें और पास ही में पूजा की थाली भी रख लें। अब उस आकृति के पास भाई को आसन पर बिठा दें और भाई से कहें कि वो अपने सिर को रूमाल से ढक ले। अब दीपक जलाएं और भाई दूज की कथा सुनें। फिर भाई के माथे पर रोली, चावल का टीका लगाएं और उसे मिठाई खिलाएं। साथ ही भाई को नारियल दें। इसके बाद भाई अपनी बहन को कुछ उपहार स्वरूप जरूर दें। इससे भाई-बहन के बीच प्यार और सम्मान बढ़ता है।

ALSO READ -  SC कॉलेजियम ने पंजाब-हरियाणा HC के जज जस्टिस मनोज बजाज का तबादला इलाहाबाद HC करने का आदेश किया जारी
भाईदूज

हिन्दी पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की ​द्वितीया तिथि के दिन चित्रगुप्त पूजा होती है। भाईदूज के दिन श्री चित्रगुप्त जयंती मनाते हैं. इस दिन पर कलम-दवात पूजा (कलम, स्याही और तलवार पूजा) करते हैं जिसमें पेन, कागज और पुस्तकों की पूजा होती है। यह वह दिन है, जब भगवान श्री चित्रगुप्त का उद्भव ब्रह्माजी के द्वारा हुआ था। जो सभी के लेखनी की इच्छा-कामना को सहज ही पूर्ण करते हैं, उनका नाम चित्रगुप्त है. ऐसे तो चित्रांश सहित कितने ही जन देव श्री चित्रगुप्त की नित्य आराधना किया करते हैं। पर हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को इनका वार्षिक उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।

चित्रगुप्त पूजा मुहूर्त

चित्रगुप्तपूजन कलम दवात पूजा

कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि का प्रारंभ 16 नवंबर को सुबह 07:06 बजे से हो रहा है, जो 17 नवंबर को तड़के 03:56 बजे तक है. ऐसे में आप चित्रगुप्त पूजा 16 नवंबर को करें। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:45 से दोपहर 02:37 तक है।

विजय मुहूर्त दोपहर 01:53 बजे से दोपहर 02:36 तक है. अभिजित मुहूर्त दिन में 11:44 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक है. आप इन मुहूर्त में चित्रगुप्त पूजा कर सकते हैं।

You May Also Like