ग्रामीण क्षेत्रों में भी निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर बीते कुछ वर्षों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। प्रदेश सरकार का दावा है कि वर्ष 2017 के बाद बिजली उत्पादन, आपूर्ति और वितरण व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को लंबे बिजली कटौती का सामना करना पड़ता था और कई इलाकों में निर्धारित रोस्टर के अनुरूप भी आपूर्ति नहीं हो पाती थी। वहीं वर्तमान में प्रदेश के जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर लगभग 22 घंटे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति किए जाने का दावा किया जा रहा है।
प्रदेश में बढ़ती मांग को पूरा करने के क्षेत्र में भी नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। मई 2026 में उत्तर प्रदेश ने 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड विद्युत मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसे राज्य की ऊर्जा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। ऊर्जा विभाग के अनुसार, यह अब तक की सर्वाधिक बिजली मांग थी, जिसका निर्बाध प्रबंधन किया गया।
बिजली उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 की तुलना में प्रदेश की उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी हो चुकी है। वर्तमान में राज्य का बिजली उत्पादन 9,120 मेगावाट तक पहुंच गया है, जिससे बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने और उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिली है।
ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों के तहत ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, नए उपकेंद्रों की स्थापना, जर्जर लाइनों के आधुनिकीकरण तथा तकनीकी हानियों को कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने और आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया है।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश को प्रोत्साहन और आम जनजीवन को सुचारु बनाए रखने में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति की अहम भूमिका रही है। वहीं विपक्ष इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाता रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में अब भी बिजली कटौती की शिकायतों का मुद्दा उठाता है।
हालांकि, रिकॉर्ड मांग की पूर्ति और उत्पादन क्षमता में वृद्धि के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में पिछले वर्षों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। आने वाले समय में बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र में निरंतर निवेश और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता बनी रहेगी।
