पोस्ट दृश्य: 20
दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने निर्देश दिया कि दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून को सीलबंद खाली जगह नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार नोटिस जारी करने पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
दिल्ली उच्च न्यायालय मंगलवार को केंद्र सरकार की उस सर्वसम्मति को रिकॉर्ड में लिया गया, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली जिमखाना क्लब को उसकी जमीन से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। केंद्र ने अदालत को बताया कि अगर भविष्य में कार्रवाई की जरूरत है तो वह केवल नोटिस जारी करेगा और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही की जाएगी।
मामला उस सरकारी ऑर्डर से हटा दिया गया है जिसमें क्लब को 5 जून तक लुटियन्स दिल्ली स्थित कॉम्प्लेक्स अपना खाली करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख अपनाया था।
उच्च न्यायालय में केन्द्र का बड़ा समर्थक
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को साफ कर दिया कि 5 जून को क्लब की जमीन पर कब्जा करने पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि 22 मई को जारी नोटिस का उद्देश्य केवल विशेष पट्टा (सतत लीज) को समाप्त करना और जमीन पर कब्ज़ा करने की प्रक्रिया शुरू करना था।
फेथ ने कोर्ट को बताया कि सरकार की ओर से अचानक बेदखली जैसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। यदि आगे कोई कदम उठाया जाता है तो वह कानूनी प्रक्रिया और नोटिस के तहत ही होगा।
अस्थायी राहत की आवश्यकता नहीं: उच्च न्यायालय
केंद्र के इस बयान के बाद अवनीश झिंगन उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के अंतरिम ऑर्डर की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट का मानना था कि जब केंद्र सरकार स्वयं यह कह रही है कि कोई बल प्रयोग नहीं होगा, तब उग्र हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी।
हालांकि हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना लिखित जवाब मांगा है। अदालत ने क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों द्वारा माइल्स पर सुनवाई को बनाए रखने का निर्णय लिया है।
क्लब प्रबंधन ने भी खींचा सवाल
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने यह भी बताया कि क्लब के स्थिर ऑपरेशन मंडल को पहले ही अपने शेयरधारकों से संबंधित अधिकारियों की सहमति का भुगतान करना होगा। इस निकाय में केंद्र सरकार द्वारा नामित सदस्य भी शामिल हैं।
क्लब प्रबंधन का कहना है कि सरकार की कार्रवाई और बढ़े हुए ग्राउंड रेंट ने संस्था के संचालन पर गंभीर प्रभाव डाला है। इसी वजह से क्लब ने पहले भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
दिल्ली जिम खाना क्लब विवाद क्या है?
केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए 27.3 भूमि खाली करने के निर्देश दिया था. यह भूमि राजधानी के अत्यंत महत्वपूर्ण लुत्तियन जोन में स्थित है।
विवाद की एक बड़ी वजह क्लब के ग्राउंड रेंट में भारी बढ़ोतरी भी है। क्लब के मुताबिक उनका एनुअल रिटेलर साल 2023 तक 409.50 रुपये तक पहुंच गया, जो कि 4.10 करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में यह फिर से बढ़कर 47.59 करोड़ रुपये हो गया।
क्लब ने कोर्ट में पेश किया कि कैबिनेट मंत्री के लैंड एंड डियोलॉजी ऑफिसर द्वारा जारी नोटिस मनमाने और अव्यवहारिक हैं। क्लब ने इन नोटिसों को रद्द करने की मांग की है।
क्लब की विरासत से जुड़ा हुआ है औपनिवेशिक काल
दिल्ली जिम खाना क्लब देश के सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक कलाकारों में से एक है। स्थापना वर्ष 1913 में “इंपीरियल दिल्ली जिम खाना क्लब” के रूप में हुई थी। ब्रिटिश शासन के दौरान यह शाही क्लब अधिकारियों और उच्च वर्ग के सामाजिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ था।
स्वतंत्रता के बाद “इंपीरियल” शब्द हटा दिया गया, लेकिन क्लब की पहचान, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा काफी हद तक बनी रही। पिछले 113 वर्षों में यह संस्था दिल्ली के डेमोक्रेट सामाजिक जीवन का प्रतीक बनी हुई है।
क्या?
अब इस मामले में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन को अपना विस्तृत पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। ओबीसी हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए कोई बेदाग कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में अगले कुछ दिनों में इस मामले में केवल संपत्ति का अधिकार नहीं बल्कि सरकारी नियंत्रण और ऐतिहासिक अवशेषों की स्वामिता से संबंधित बड़े कानूनी सवाल भी पूछे जा सकते हैं।
टैग:
#डेल्हीजिमखानाक्लब #दिल्लीहाईकोर्ट #तुषारमेहता #लुटियन्सदिल्ली #ग्राउंडरेंटविवाद #सेंट्रलगवर्नमेंट #लीगलन्यूज #दिल्लीन्यूज #हाईकोर्टहियरिंग #प्रॉपर्टीडिस्प्यूट #दिल्लीजिमखानाक्लब #दिल्लीहाईकोर्ट #कानूनीखाट #तुषारमेहता #लुटियन्सदिल्ली #मार्टरेंट #संपत्तिवाद
