फर्जी दस्तावेजों के जरिए कराया जाता था GST रजिस्ट्रेशन
लखनऊ क्राइम ब्रांच ने फर्जी GST फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की कर चोरी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर 2.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन और 107 संदिग्ध रजिस्ट्रेशन का खुलासा किया।
लखनऊ क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, GST कर चोरी गिरोह का पर्दाफाश
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की क्राइम ब्रांच, साइबर सेल, सर्विलांस टीम और इटौंजा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी GST फर्मों के जरिए कर चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। जांच में करीब 2.5 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन और 107 संदिग्ध रजिस्ट्रेशन का पता चला है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए कराया जाता था GST रजिस्ट्रेशन
27 अगस्त 2025 को राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक की शिकायत पर थाना इटौंजा में मुकदमा संख्या 156/2025 दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अल्तमस ट्रेडर्स नामक फर्जी फर्म ने नकली किरायानामा और अन्य दस्तावेजों के आधार पर GST पंजीकरण कराकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अनुचित लाभ लिया और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया।
साइबर जांच में सामने आए 107 संदिग्ध रजिस्ट्रेशन
क्राइम ब्रांच की तकनीकी और वित्तीय जांच में संदिग्ध मोबाइल नंबरों से जुड़े 10 IMEI नंबरों की पहचान की गई। इनके विश्लेषण से 225 मोबाइल नंबर सामने आए, जिनमें से 107 नंबरों पर विभिन्न कंपनियों का पंजीकरण पाया गया।
इसके बाद पुलिस ने सीतापुर निवासी बुद्धिप्रकाश अवस्थी (35) को गिरफ्तार किया, जो वर्तमान में लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में रह रहा था।
चार फर्जी फर्मों का संचालन कर रहा था गिरोह
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर कई फर्जी फर्मों का संचालन कर रहा था। इनमें शामिल हैं—
- अल्तमस ट्रेडर्स
- कुमार ट्रेडर्स
- सुप्रीम एंटरप्राइजेज
- बुद्धा एंटरप्राइजेज
इसके अलावा जांच में सनलाइट एंटरप्राइजेज नामक एक अन्य फर्जी कंपनी का भी पता चला है।
अस्तित्व में नहीं थी अल्तमस ट्रेडर्स
विवेचना में सामने आया कि अल्तमस ट्रेडर्स नाम की फर्म वास्तविक रूप से अस्तित्व में ही नहीं थी। आरोपी किराये पर दुकान लेकर उसके पते का इस्तेमाल GST पंजीकरण के लिए करता था और फर्जी इनवॉइस बनाकर ऑनलाइन ITC जनरेट कर टैक्स चोरी करता था।
गरीब लोगों के दस्तावेजों का होता था इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेज हासिल करता था। बाद में फर्जी किरायानामा और बिजली बिल तैयार कर उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी GST फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता था।
2.25 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मिला
जांच में पाया गया कि केवल अल्तमस ट्रेडर्स के पंजाब नेशनल बैंक खाते में करीब 2,25,99,522 रुपये का लेन-देन हुआ था। इसके अलावा विभिन्न खातों में कुल लगभग 2.5 करोड़ रुपये के वित्तीय ट्रांजेक्शन का पता चला है। पुलिस संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई कर रही है।
मोबाइल, डेबिट कार्ड और चेकबुक बरामद
गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से पुलिस ने बरामद किया—
- 7 डेबिट कार्ड
- 6 मोबाइल फोन
- 1 चेकबुक
- 1 सिम कार्ड
- बैंक दस्तावेज और अन्य कागजात
पहले भी ऐसे गिरोह का खुलासा कर चुकी है क्राइम ब्रांच
एडीसीपी क्राइम किरन यादव (आईपीएस) ने बताया कि इससे पहले भी क्राइम ब्रांच ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था, जो मुद्रा लोन दिलाने के नाम पर लोगों के मूल दस्तावेज लेकर फर्जी GST फर्में बनाते थे और ITC चोरी करते थे।
लोगों से पुलिस की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे पैसे के लालच में किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपने मूल दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक खाते या जन्म प्रमाणपत्र साझा न करें, क्योंकि इनका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जी कंपनियां बनाने में किया जा सकता है।
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