News: सूरज से उठा महातूफान धरती से टकराने की ओर बढ़ा, आसमान में दुर्लभ नजारा, जानें भारत पर क्या असर


अमेरिकी एजेंसियों NASA और NOAA Space Weather Prediction Center ने G3 स्तर के इस भूचुंबकीय तूफान को लेकर चेतावनी जारी की है. इसका असर इतना मजबूत हो सकता है कि भारत के उत्तरी हिस्सों, खासकर लद्दाख में, नॉर्दर्न लाइट्स यानी अरोरा दिख सकते हैं. 8 जून की रात आसमान में एक दुर्लभ नजारा दिखने की संभावना है क्योंकि सूरज से निकला एक शक्तिशाली सोलर स्टॉर्म आज धरती से टकरा सकता है.

6 जून को सूरज की सतह पर Active Region 4461 नाम के क्षेत्र में M1.8 श्रेणी का सोलर फ्लेयर फटा था. इसके साथ ही एक विशाल प्लाज्मा बादल जिसे CME यानी Coronal Mass Ejection कहा जाता है अंतरिक्ष में निकला और अब तेज रफ्तार से धरती की ओर बढ़ रहा है.  

सूरज से उठे तूफान की स्पीड ने डराया

वैज्ञानिकों के अनुसार यह बादल करीब 1400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा कर रहा है और आज इसके धरती के मैग्नेटिक फील्ड से टकराने की संभावना है. इस सोलर स्टॉर्म को G3 यानी ‘Strong’ श्रेणी में रखा गया है. आसान भाषा में समझें तो सोलर तूफानों को G1 से G5 तक मापा जाता है जिसमें G1 सबसे हल्का और G5 सबसे खतरनाक होता है.

G3 स्तर के तूफान में सैटेलाइट सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं, GPS में गड़बड़ी आ सकती है, रेडियो संचार बाधित हो सकता है और कुछ जगहों पर पावर ग्रिड पर भी असर पड़ सकता है. एजेंसियों ने 8 जून के लिए G3 और 9 जून के लिए G2 स्तर का अलर्ट जारी किया है.

आसमान में दुर्लभ नजारा

इस घटना का सबसे दिलचस्प पहलू इसका दृश्य असर है. आज रात करीब 11:30 बजे से लेकर 9 जून की रात 2:30 बजे के बीच लद्दाख के हान्ले जैसे ऊंचे और अंधेरे इलाकों में अरोरा दिखने की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है. हान्ले करीब 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां Indian Astronomical Observatory मौजूद है जहां जनवरी 2026 में भी अरोरा रिकॉर्ड किया गया था.

यह पहली बार नहीं है जब भारत की धरती से भी अरोरा देखने का मौका बन रहा हो. 2024 में लद्दाख के हान्ले स्थित Indian Astronomical Observatory में बड़े सोलर तूफानों के दौरान अरोरा रिकॉर्ड किया गया था. उस साल मई में G5 यानी एक्सट्रीम श्रेणी का भूचुंबकीय तूफान आया था जो पिछले दो दशकों में सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक माना गया.

भारत के इन शहरों से दिखेगा नजारा

लद्दाख के अलावा नुब्रा वैली, पैंगोंग त्सो, कश्मीर के ऊंचे इलाके और उत्तराखंड की पहाड़ियों में भी हल्की लाल या गुलाबी चमक दिखाई दे सकती है लेकिन इसके लिए आसमान का साफ होना जरूरी है. वहीं दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में यह नजारा देख पाना मुश्किल है क्योंकि यहां लाइट पॉल्यूशन बहुत ज्यादा है और मौसम भी बाधा बन सकता है.

दुनिया के अन्य हिस्सों में यह नजारा ज्यादा स्पष्ट दिख सकता है. स्कॉटलैंड, आइसलैंड, स्कैंडिनेवियाई देश, कनाडा और अमेरिका के उत्तरी राज्यों में अरोरा का शानदार दृश्य देखने को मिल सकता है. वहीं दक्षिणी गोलार्ध में न्यूजीलैंड, तस्मानिया और अर्जेंटीना-चिली के दक्षिणी हिस्सों में भी आसमान रंगीन हो सकता है.

सूरज से तूफान कब उठता है?

अरोरा तब बनता है जब सूरज से आए charged कण धरती के वायुमंडल की ऊपरी परत में मौजूद गैसों से टकराते हैं. इस प्रक्रिया में ऊर्जा निकलती है, जो हरे, लाल और बैंगनी रंग की रोशनी के रूप में आसमान में लहराती दिखाई देती है. यह नजारा विज्ञान और प्रकृति का अनोखा संगम है. हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार सोलर स्टॉर्म की सटीक तीव्रता और असर आखिरी समय में बदल सकता है. ऐसे में अरोरा दिखने की संभावना जरूर है लेकिन इसकी कोई पक्की गारंटी नहीं है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर आज रात आसमान पर टिकी हुई है.

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