दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध जारी: सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय प्रभाव को सर्वोपरि माना

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध जारी: सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय प्रभाव को सर्वोपरि माना

संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध बरकरार रखते हुए कहा – “प्रदूषण मुक्त हवा हर नागरिक का अधिकार”

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध जारी: सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय प्रभाव को सर्वोपरि माना

नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखते हुए इसके उत्पादन, भंडारण और बिक्री में किसी भी प्रकार की ढील देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है, और प्रतिबंध हटाने का कोई उचित आधार नहीं है।

पटाखों पर प्रतिबंध से 30% प्रदूषण में आई कमी

सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि पटाखों पर रोक से दिल्ली में वायु प्रदूषण में 30% तक की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, इस प्रतिबंध को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक ने तर्क दिया कि पटाखों में मौजूद सल्फर हवा को शुद्ध करने में सहायक होता है

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइंया की खंडपीठ ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और कहा, “क्या आप वैज्ञानिक संस्था NEERI (नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) से भी बड़े विशेषज्ञ हैं?”

ग्रीन पटाखों पर भी नहीं मिली राहत

सुनवाई के दौरान पटाखा निर्माता कंपनियों ने अदालत को सूचित किया कि वे पटाखों की गुणवत्ता में सुधार लाने और ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में मात्र 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं, जो वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस आधार पर कोर्ट ने पूरे वर्ष के लिए पटाखों पर प्रतिबंध जारी रखने का निर्णय लिया।

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विदेशी साजिश का आरोप खारिज, भड़काऊ बयान पर चेतावनी

एक याचिकाकर्ता ने पटाखों पर प्रतिबंध को विदेशी एजेंसियों की साजिश करार देते हुए आरोप लगाया कि भारत विरोधी विदेशी संस्थाओं से चंदा लेकर पर्यावरणविद् और संगठन इस प्रतिबंध का समर्थन कर रहे हैं। अदालत ने इस दावे को बेबुनियाद और निराधार बताते हुए आवेदन को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “यह आपकी पहली गलती है, इसलिए हम इस बार जुर्माना नहीं लगा रहे हैं, लेकिन भविष्य में ऐसी भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना याचिकाओं पर सख्त कार्रवाई होगी।”

संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा – “प्रदूषण मुक्त हवा हर नागरिक का अधिकार”

सुनवाई के दौरान अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीने का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। पीठ ने जोर देते हुए कहा कि हर नागरिक एयर प्यूरिफायर नहीं खरीद सकता, और वायु प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग होते हैं, जो सड़कों पर काम करने के लिए मजबूर हैं।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करने और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने सरकार, उद्योगों और नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की और स्पष्ट किया कि अस्थायी राहत देने की जगह, दीर्घकालिक पर्यावरणीय हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

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