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₹423 करोड़ के शेयर रेफ्रिजरेटर मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: संपत्ति ही नहीं, उसकी आर्थिक कीमत भी जरूरी
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने महादेव ऑफ़लाइन बुक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कहा गया कि पीएमएलए के तहत रेफ्रीजिरेटर की संपत्ति का केवल नियंत्रण बनाए रखना ही उचित नहीं है। बाजार से जुड़ी प्रतिभूतियों के मामले में उनकी आर्थिक कीमत की सुरक्षा भी जरूरी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा महादेव ऑफ़लाइन बुक मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान रेफ्रिजरेटर ने ₹423 करोड़ से अधिक मूल्य के स्टॉक और सिक्योरिटीज से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संपत्ति को रेफ्रीजिरेटर कर देना उच्च गुणवत्ता वाला सामान नहीं है, बल्कि जब तक कानूनी ऋण पर काम चल रहा है, तब तक उसकी आर्थिक कीमत (Economic Value) भी सुरक्षित रखनी जरूरी है।
-रविन्द्र कुमार अग्रवाल उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टॉक और बाजार आधारित प्रतिभूतियों के मामले में संरक्षण (संरक्षण) का अर्थ केवल उन पर कानूनी नियंत्रण बनाए रखना नहीं है। इन निवेशों का मूल्य दैनिक बाजार के दायरे से प्रभावित होता है, इसलिए उनकी वास्तविक आर्थिक कीमत को सुरक्षित रखने के लिए भी संरक्षण का सिद्धांत शामिल है।
पूरा मामला क्या है?
आठ कंपनियों से टूरिस्ट कंपनी में डीमैट और इन्वेस्टमेंट पोर्ट्रेट शामिल हैं, फरवरी 2024 में एचडी ने रेफ्रिजरेटर कर दिया था। इन दस्तावेजों में मौजूद स्टॉक और सिक्योरिटीज की कुल कीमत ₹423 करोड़ से ज्यादा बताई गई है।
एचडी ने यह कार्रवाई कथित महादेव ऑफ़लाइन बुक मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की थी। बाद में पीएमएलए के तहत स्टोइन्टॉल क्लाइमेट अथॉरिटी (एडज्यूडिकेटिंग अथॉरिटी) ने भी रेफ्रिजरेटरिंग ऑर्डर की पुष्टि कर दी। विपक्ष ने इन विज्ञापनों में अपीलीय न्यायधिकरण के समक्ष चुनौती दी है, जहां मामला अभी भी लंबित है।
कंपनी ने क्या डील दी?
ग्रेटर नोएडा की कंपनी ओरेगन की ओर से आंध्र प्रदेश के दिग्गज दिग्गज विक्ट्री अग्रवाल और आंध्र प्रदेश के दिग्गज मालदीव ने अदालत को बताया कि पीएमएलए के तहत संपत्तियों को रेफ्रिजरेटर बनाने का उद्देश्य उनकी सुरक्षा करना है, न कि उनकी कीमत को बाजार में गिरा देना।
उन्होंने तर्क दिया कि रेफ़्रिजरेटर के बाज़ार जोखिम के संपर्क में लगातार बने रहने और लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनकी कीमत काफी कम हो सकती है। एक्जीक्यूटिव ने सुझाव दिया कि पीएचडी की निगरानी में इन स्टॉक को बेचकर प्राप्त राशि को सेबी-नियंत्रित फ़्रैंचाइज़ी फ़ंड या अन्य इन्वेस्टमेंट इन्वेस्टर्स में रखा जा सकता है, जबकि नियंत्रण पूरी तरह से एचडी के पास ही बनाया जा रहा है।
एचडी ने किया विरोध
एचडी ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि रेफ्रिजरेटर द्वारा किए गए निवेश पर कथित तौर पर अपराध की आय (अपराध की आय) बताई गई है। एजेंसी का तर्क यह था कि परिसंपत्तियों के परिसमापन (परिसमापन) या पुनर्निवेश की अनुमति से पीएमएलए की वैधानिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
एचडी ने यह भी कहा कि कटौती पहले ही वैधानिक अपीलीय उपाय अपनाई गई थी, इसलिए रीट सूची आवेदन योग्य नहीं है।
उच्च न्यायालय ने क्या कहा?
कोर्ट ने साफ किया कि वह इस चरण में यह तय नहीं कर रही हैं रेफ़्रिजरेटरिंग आदेश वैध है या नहीं, या संबंधित संपत्ति वास्तव में अपराध की श्रेणी में है या नहीं। इन सभी मुद्दों पर पहले से ही अपीलीय न्यायधिकरण और विशेष अदालत के बारे में विचार पढ़ें।
अदालत ने कहा कि उनकी सहमति केवल एक सीमित प्रश्न है—क्या रेफ्रिजरेटर की बाजार आधारित प्रतिभूतियों की आर्थिक कीमत को सुरक्षित रखने के लिए कोई व्यवस्था की जा सकती है?
शेयर और जमीन एक जैसे नहीं
जजमेंट में कोर्ट ने कहा कि शेयर और जमीन, भवन या सफ़ाई जमा जैसी स्थिर संपत्ति से मूल रूप से अलग हैं।
कोर्ट ने कहा कि:
“यदि किसी बाजार आधारित एसेट को वर्षों तक रेफ्रिजरेटर रखा जाए, तो उसकी कीमत में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे रेफ्रिजरेटरिंग का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो सकता है।”
अदालत ने माना कि पीएमएलए और उससे जुड़े उपकरणों में स्टॉक और सिक्योरिटीज पर नियंत्रण बनाए रखने की व्यवस्था तो है, लेकिन उनकी आर्थिक कीमत बाजार में उतार-चढ़ाव से बचने का कोई तंत्र नहीं है।
कानून की शैलियाँ प्रतिबंधित नहीं
उदाहरण अग्रवाल ने कहा कि कानून में किसी भी व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया जा सकता है, ऐसे उपाय पर रोक नहीं मानी जा सकती है, जो संपत्ति के मूल्य की रक्षा के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर स्टॉक की कीमत में बढ़ोतरी होती है तो उसका लाभ भी अंततः संपत्ति का हिस्सा माना जाएगा। ऐसे में मूल्य संरक्षण को महत्वपूर्ण नहीं माना जा सकता।
संपत्ति छूट की नहीं, असबाब की कीमत की मांग
कोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि प्रॉपर्टी को रिलीज या वापस लेने की मांग नहीं की जा रही है।
कंपनियों ने केवल इतना आग्रह किया था कि यदि कोई निवेश संरचना नहीं बनाई जाए तो बिक्री से प्राप्त राशि पर पूरी तरह से एचडी के नियंत्रण में रहे और भविष्य में ज़ब्ती (जब्ती) पर वसूली की आवश्यकता हो।
उच्च न्यायालय के निर्देश
जजमेंट केस में कोर्ट ने कहा कि पीएमएलए के तहत संपत्ति के संरक्षण का अर्थ, बाजार आधारित प्रतिभूतियों में उनकी आर्थिक कीमत का भी संरक्षण है।
अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसा उपयुक्त तंत्र विकसित किया जाए जिससे रेफ्रिजरेटर में लगे निवेशों की कीमत सुरक्षित रह सके, जबकि मूल राशि पूरी तरह से पहचानने योग्य, ट्रैस करने योग्य और एचडी के नियंत्रण में बनी रहे।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ऐसी किसी भी व्यवस्था की चल रही जांच, किसी की सामग्री या सहायक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसका उद्देश्य केवल अंतिम निर्णय आना है ताकि सीमांत की आर्थिक कीमत को सुरक्षित रखा जा सके।
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