पोस्ट दृश्य: 52
अमेज़ॅन द्वारा जमा की गई नो भी रैस आठ सप्ताह के भीतर 6% वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए
न्यायालय सर्वोच्च सीसीआई द्वारा रिचार्ज पर ₹202 करोड़ का जुर्माना रद्द कर दिया गया। कोर्ट ने जमा राशि 6% ब्याज सहित रिटर्न का भी ऑर्डर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न को बड़ी राहत देते हुए भारतीय डिस्काउंट कमीशन (CCI) द्वारा दिए गए ₹202 करोड़ के आवंटन को रद्द कर दिया।
अनमोल विक्रम नाथ और अमीर संदीप मेहता की पृष्ण ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अमेज़न द्वारा जमा की गई नो भी राइस पर आठ सप्ताह के भीतर 6% वार्षिक ब्याज वापस लिया जाए।
देरी होने पर 9% ब्याज देना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित आठ सप्ताह की अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर 6% से लेकर 9% की छूट कर दी जाएगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि तय समयसीमा के बाद किसी भी राशि पर भुगतान होने तक 9% वार्षिक ब्याज लागू रहेगा।
2019 का फ्यूचर कूपन डिल से टूर मामला
पूरा विवाद वर्ष 2019 में अमेज़ॅन द्वारा फ्यूचर कूपन प्राइवेट। लिमिटेड में 49% सीमेंट के टुकड़े बेचे गए थे। इस निवेश की कुल कीमत लगभग ₹1,431 करोड़ थी।
फ्यूचर कूपन के पास आगे फ्यूचर रिटेल के शेयर थे, क्योंकि यह डील भारतीय सेक्टर सेक्टर में काफी लोकप्रिय हो रही है।
सीसीआई ने लगाए गंभीर आरोप
दिसंबर 2021 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) इस सौदे को अपनी पूर्व मंजूरी पर निलंबित कर दिया गया था।
सीसीआई का आरोप था कि अमेज़ॅन ने यह खुलासा नहीं किया कि फ्यूचर कूपन डील और उससे जुड़े अन्य एक्ट वास्तव में एक “एकीकृत लेनदेन” (एकीकृत लेनदेन) का हिस्सा थे।
नियामक ने यह भी आरोप लगाया कि अमेज़ॅन ने भारतीय अमूल्य शेयरों और शेयरधारकों के बीच न्यायाधिकरण के समझौते में इस सौदे की संरचना और उद्देश्य को लेकर अलग-अलग और विरोधाभासी बयान दिए हैं।
₹200 करोड़ और ₹2 करोड़ की अलग-अलग कीमत
CCI ने Amazon पर दो अलग-अलग पेनल्टी प्लॉट थे।
- कथित तौर पर डील की सही जानकारी और अधिसूचना में ₹200 करोड़ की कमी का अनुमान लगाया गया था।
- अतिरिक्त ₹2 करोड़ का जुर्माना महत्वपूर्ण दस्तावेजों में लगाया गया था।
इसके साथ ही आयोग ने फ्यूचर कूपन्स में अमेज़ॅन की स्टॉक एक्सचेंज को भी प्रभावित (स्थगित) कर दिया था।
एनसीएलटी से नहीं मिली राहत
अमेज़न ने सीसीआई के आदेश को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में चुनौती दी थी। हालाँकि, वर्ष 2022 में NCLT ने CCI की अध्यक्षता की।
इसके बाद कंपनी सर्वोच्च न्यायालय ने 2023 में उन्हें राहत प्रदान की मिली थी। उस समय कोर्ट सुप्रीम ने सीसीआई द्वारा दिए गए प्लांट पर रोक लगा दी थी।
काउंसिल रेगुलेशन पर असर डालने वाला निर्णय हो सकता है
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत में काउंसिल निवेश, स्केटिंग लॉ और लाइसेंसिंग फर्म से जुड़े मामलों पर अहम विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञ के अनुसार, इस निर्णय में भविष्य में बड़े निवेश निवेश में सूचना समर्पण (प्रकटीकरण) और प्रमाणित प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी सूची बन सकती है।
टैग:
#सुप्रीमकोर्ट #अमेज़ॅन #सीसीआई #फ्यूचरकूपन #फ्यूचररिटेल #प्रतिस्पर्धा कानून #एनसीएलटी #कॉर्पोरेट कानून #ईकॉमर्स #लीगलन्यूज #सुप्रीमकोर्ट #अमेजन #सीसीआई #कॉर्पोरेटमामला #प्रतिस्पर्धाकानून #कानूनीखबर
