सुप्रीम कोर्ट ने BAMS छात्र को कोर्स पूरा करने की दी अनुमति, न्यायालय के सिद्धांत का हवाला दिया

सुप्रीम कोर्ट ने BAMS छात्र को कोर्स पूरा करने की दी अनुमति, न्यायालय के सिद्धांत का हवाला दिया

सुप्रीम कोर्ट ने BAMS छात्र को कोर्स पूरा करने की दी अनुमति, न्यायालय के सिद्धांत का हवाला दिया

 

⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्थापित सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि “न्यायालय की किसी भी कार्रवाई से किसी व्यक्ति को अन्याय नहीं होना चाहिए” (Actus curiae neminem gravabit) और इसी आधार पर एक BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) छात्र को उज्जैन के शासकीय स्वशासी धन्वंतरी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में अपना कोर्स एवं इंटर्नशिप पूरा करने की अनुमति प्रदान की।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि, “छह वर्षों तक BAMS की पढ़ाई करने के बावजूद, उच्च न्यायालय के आदेश ने छात्र की पूरी मेहनत को निष्फल कर दिया। यह न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के विरुद्ध है, जिसे उच्च न्यायालय को ध्यान में रखना चाहिए था।”


📝 मामला संक्षेप में

  • अपीलकर्ता छात्र ने 2008 में मध्य प्रदेश संस्कृत बोर्ड, भोपाल से 12वीं उत्तीर्ण की।
  • उसे स्मृति धैर्यप्रभा देवी सोजातिया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, मंधसौर में BAMS कोर्स में प्रवेश मिला।
  • प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद, यह कॉलेज अमान्य घोषित कर दिया गया और छात्रों को शासकीय स्वशासी धन्वंतरी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, उज्जैन स्थानांतरित कर दिया गया।
  • लेकिन अपीलकर्ता को यह लाभ नहीं दिया गया क्योंकि उसने 12वीं में ‘अंग्रेजी’ विषय नहीं पढ़ा था।
  • इसके विरुद्ध, छात्र ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, लेकिन न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी और पुनर्विचार याचिका भी असफल रही।

📌 सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रवेश की मूलभूत पात्रता आवश्यक होती है, लेकिन इस विशेष मामले में उच्च न्यायालय को छात्र की स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए था।

  • छात्र की प्रथम प्रवेश प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध थी, क्योंकि 2008 के मध्य प्रदेश आयुर्वेद/यूनानी/होम्योपैथी स्नातक प्रवेश परीक्षा नियम के अनुसार, 12वीं में अंग्रेजी विषय पास करना अनिवार्य था।
  • लेकिन कॉलेज ने उसे अस्थायी प्रवेश दे दिया, जिसके कारण उसने बाद में अंग्रेजी विषय के साथ परीक्षा दी और उसे उत्तीर्ण किया।
  • न्यायालय ने पाया कि छात्र ने इस निर्देश का पालन किया और 12वीं की परीक्षा दोबारा देकर अंग्रेजी विषय में 70 अंक प्राप्त किए।
  • छात्र ने छह वर्षों तक BAMS कोर्स में अध्ययन किया और लगभग पूरा कर लिया था, इसलिए केवल प्रारंभिक पात्रता विवाद के आधार पर उसकी पूरी मेहनत को बेकार करना अनुचित होगा
ALSO READ -  Ex SUPREME COURT न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन लोकुर को संयुक्त राष्ट्र आंतरिक न्याय परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

🔖 अंतिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि –

छात्र को शासकीय स्वशासी धन्वंतरी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, उज्जैन में अपना कोर्स और इंटर्नशिप पूरी करने दी जाए।
संबंधित अधिकारी उसे BAMS डिग्री जारी करें।


⚖️ पक्षकारों की ओर से अधिवक्ता

  • अपीलकर्ता की ओर से: अधिवक्ता एल.सी. पटने
  • प्रतिवादियों की ओर से: एओआर मृणाल गोपाल एल्कर

📌 निष्कर्ष

यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्याय के व्यापक सिद्धांतों को प्राथमिकता देने का उदाहरण है। न्यायालय ने छात्र की छह वर्षों की मेहनत को महत्व देते हुए, महज़ प्रारंभिक पात्रता विवाद के आधार पर उसका भविष्य अंधकार में डालने से इंकार कर दिया।

वाद शीर्षक – ज़ैद शेख बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य

Translate »