सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना मुहर लगे या अपर्याप्त मुहर लगे समझौतों में मध्यस्थता धाराएं लागू करने योग्य, यह दस्तावेज़ को अस्वीकार्य बनाता है

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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना मुहर लगे या अपर्याप्त मुहर लगे समझौतों में मध्यस्थता धाराएं लागू करने योग्य हैं। ऐसा करते हुए न्यायालय ने मैसर्स एन.एन. ग्लोबल मर्केंटाइल प्रा. लिमिटेड बनाम मैसर्स. इंडो यूनिक फ्लेम लिमिटेड और अन्य मामले में इस साल अप्रैल में 5-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले को खारिज कर दिया और 3:2 के बहुमत से माना कि बिना मुहर लगे मध्यस्थता समझौते लागू करने योग्य नहीं हैं।

सी जे आई डॉ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि स्टाम्प की अपर्याप्तता समझौते को शून्य या अप्रवर्तनीय नहीं बनाती है, बल्कि इसे लागू करने योग्य नहीं बनाती है। यह साक्ष्य में अस्वीकार्य है।

केस टाइटल – मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 और भारतीय स्टाम्प एक्ट 1899 क्यूरेटिव पेट (सी) नंबर 44/2023 के तहत मध्यस्थता समझौतों के बीच आर.पी. (सी) संख्या 704/2021 में सी.ए. क्रमांक 1599/2020

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