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कोर्ट ने व्यापक ‘विक्टिम ऋण योजना’ जारी करते हुए केंद्र और राज्यों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए-
- असाधारण का गैर-अपराधीकरण
- बंद आश्रय गृह बेस्ड रासायन मॉडल पर रियॉ
- वैधानिक यौन शिक्षा का अधिकार
- व्यापक मानव विरोधी कानून
- बाल बॅाडेलिटी की परिभाषा
मानव अधिकारों के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई का महत्वपूर्ण पर्यवेक्षण
न्यायालय सर्वोच्च मानव और व्यावसायिक यौन शोषण (Commercial Sexual Exploitation-CSE) के बौद्धिक अधिकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में व्यापक निर्णय सुनाते हुए कहा गया कि धार्मिक और व्यावसायिक यौन शोषण (Commercial Sexual Exploitation-CSE) के तहत धार्मिक और व्यावसायिक यौन शोषण (Commercial Sexual Exploitation-CSE) के धार्मिक अधिकार का सिद्धांत 21 के तहत शामिल है।
त्राहिमाम जे.बी. पारडीवाला और रेस्तरां आर. महादेवन की खण्डपीठ ने मानव अधिकारों को मानव गरिमा, शारीरिक स्वावलंबन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर हमले वाले पीड़ित-दर्शक नजरिये से दर्शाया। अदालत ने बचाव, संरक्षण, संरचना, पुनर्स्थापन और अभियोजन की पूरी प्रक्रिया को एक व्यापक रूप से विखंडित करने के लिए कहा “विक्टिम आरक्षण योजना” जारी किया गया।
प्रज्वला की नामांकन दाखिल करने का मामला शुरू हुआ
इस मामले में वर्ष 2004 में पुरातत्व विरोधी एक पुरातात्विक सूची (पीआईएल) का उदय हुआ था, जिसमें मानव तस्करी संगठन ‘प्रज्वला’ ने मानव जाति और वेश्यावृत्ति के शिकार लोगों की मुक्ति, संरक्षण, परंपरा और समाज में पुनर्स्थापन की व्यवस्था में मौजूद गंभीर कमियों को शामिल किया था।
प्रोड्यूसर का कहना था कि लोगों को अपराधी की तरह शिकार करते हुए देखा जाता है, जबकि वे खुद गंभीर अपराध के शिकार होते हैं।
साल 2015 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक की आजादी दी थी पुरातत्व संरचना अनुसंधान एजेंसी (OCIA) निर्मित व मानव वस्तुओं की स्थापना के लिए एक व्यापक कानून तैयार किया जाएगा। इन विद्वानों के आधार पर अदालत ने मूल याचिका का सामुद्रिक कर दिया था।
हालाँकि बाद के वर्षों में कई ड्राफ्ट माफ़ी तैयार हो गए, लेकिन ओसीआईए का गठन नहीं हुआ और कोई भी कानून व्यापक रूप से लागू नहीं हो सका। इसी कारण से सुपरमार्केट ने पुनः आरंभ करने का रुख अपनाया।
मानव अधिकारों को जटिल सामाजिक समस्या के बारे में बताया गया
अदालत ने संयुक्त राष्ट्र के पाल्मेरो रिकार्डो, 2000 विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मानव जाति को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भर्ती करना, आश्रय देना, नियंत्रण में रखना और शोषण करना भी शामिल है।
कोर्ट ने कहा कि गरीबी, सामाजिक बहिष्करण, भाषाई भेदभाव, शिक्षा की कमी, आर्थिक असुरक्षा और पारिवारिक संकट जैसे अभिनेताओं के लिए अवसर पैदा होते हैं।
पृष्ण ने कहा कि आज वैट का स्वरूप बदल दिया गया है और अब यह केवल पारंपरिक देह व्यापार आयात तक सीमित नहीं है। इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से होने वाली साइबर-सक्षम मानव तस्करी (साइबर-सक्षम मानव तस्करी – CEHT) तेजी से बढ़ रही है।
केवल गरीबी नहीं, कई पौधों का परिणाम है
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मानव अधिकारों को किसी भी कारण से नहीं समझा जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि न केवल गरीबी, बल्कि भाषाई असमानता, सामाजिक संरचना, जातीय भेदभाव, पलायन, शिक्षा की कमी और अन्य अनेकों समानताएं के संयुक्त प्रभाव से धारणाएं पैदा होती हैं।
न्यायालय के अनुसार, मानव अधिकार एक “जटिल सामाजिक घटना” है, रचना के लिए बहुविषयक (बहुविषयक) विचार आवश्यक है।
आलेख 21 और 23 के अध्ययन से निष्कर्ष का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के सिद्धांत 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और सिद्धांत 23 (मानव स्वतंत्रता और बंधुआ स्वतंत्रता का निषेध) को एक साथ जारी करते हुए कहा कि राज्य की जिम्मेदारी केवल पीड़ित को सुरक्षा तक सीमित नहीं है।
अदालत ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी द्वारा निर्धारित व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने के लिए उसकी सामाजिक, मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूपरेखा सुनिश्चित करना भी राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
पीरिन ने कहा कि रेज़िस्टेंस के बिना आरक्षण अभियान अधूरा है और एकमात्र वैल्युएशन प्रदर्शित हो रहा है।
अस्त्र का अर्थ केवल आश्रय और आर्थिक सहायता नहीं
कोर्ट ने कहा कि रेज़िस्टेंस को केवल भोजन, आश्रय, चिकित्सा सुविधा, आश्रम या सहायता प्रशिक्षण तक सीमित नहीं किया जा सकता है।
इसके साथ-साथ समाज में व्याप्त असमानता, भेदभाव को दूर करने का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अदालत के अनुसार, ईसा मसीह को मूर्तिमान तरीके से समाज में पुनः स्थापित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना सूची प्रक्रिया का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
वयोवृद्ध वयस्क यौन कार्य और सामग्री में अंतर आवश्यक
सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रत्येक वेश्यावृत्ति प्रथा का मामला मानव अधिकारों पर विचार नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि बचाव अभियान के दौरान यह जांच जरूरी है कि क्या कोई वयस्क व्यक्ति वास्तव में प्रतिष्ठा का शिकार है या अपनी इच्छा से यौन कार्य में संलग्न है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बंधक से यौन कार्य करने वाले को जेल में रखना या जेल में बंद करना उनकी स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक ‘विक्टिम आरक्षण योजना’ जारी की
अनुच्छेद 32 और 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो कानून लागू किया, वह जारी किया गया।
1. ब्रह्मांड सिद्धांत
- पीड़ितों की गरिमा और मानवाधिकार सर्वोपरिहोगे।
- व्युत्पत्ति को कभी-कभी अपराधी नहीं माना जाएगा।
- पीड़ितों की सहमति पर आधारित दृढ़ता और सुरक्षा के उपाय।
- किसी भी प्रकार के कलंक या भेदभाव का उत्तर नहीं दिया जाएगा।
- पीड़ित की सुरक्षा, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी।
2. आरक्षण से पहले और आरक्षण के दौरान की व्यवस्था
कोर्ट ने एंटी-ह्यूमन रसायन इकाइयाँ (एएचटीयू) अधिकारियों और कर्मचारियों को मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण निर्देश दिए गए। बचाव अभियान पीड़ित-संवेदनाशील तरीके से संचालित किया जाएगा।
3. बचाव के बाद संरक्षण
रेस्टॉरेंट को कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, परामर्श, सुरक्षित आवास और पर्यवेक्षण का अधिकार मिलेगा।
4. रंजिका
सांख्यिकी कार्यक्रम में शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार सृजन, सामाजिक सहायता और सरकारी मंजूरी तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
5. पुनर्स्थापना और पुनर्मिलन
परिवार या समुदाय में वापसी केवल तभी होगी जब संबंधित पीड़ित की सुरक्षा को खतरा न हो। पीड़ित की इच्छा को प्राथमिकता दी जाएगी।
6. अभियोजन और मुकदमा
पूरी तरह से रहस्यमयी प्रक्रिया के दौरान लिबरल को कानूनी और सामाजिक सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे बिना भय के दैत्य प्रक्रिया में भाग ले सकें।
7. रोकना और प्रशिक्षण
रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और अन्य हितधारकों को नियमित प्रशिक्षण निर्देश दिए गए।
OCIA के गठन का आदेश देने से न्यायालय की अस्वीकृति
कोर्ट ने पेश किया प्रस्ताव पुरातत्व संरचना अनुसंधान एजेंसी (OCIA) के गठन की आवश्यकता पर विचार किया गया।
हालाँकि न्यायालय का मानना था कि वर्तमान व्यवस्था में कई मस्जिदों के बीच जिम्मेदारियाँ बँटी हुई हैं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि कोई पूर्ण कानूनी या शून्यता मौजूद है।
इसी आधार पर अदालत ने ओसीआईए के गठन का अनिवार्य आदेश देने से इंकार कर दिया, जबकि भविष्य में इस पर विचार करने का विकल्प सरकार के लिए खुला रखा गया।
केंद्र और राज्यों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं
कोर्ट सुप्रीमो ने कई महत्वपूर्ण शोकें भी कीं—
असाधारण का गैर-अपराधीकरण
कोर्ट ने कहा कि आईटीपीए की कुछ धाराओं के खिलाफ कई बार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाता है। इस स्थिति को बनाए रखने के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता है।
बंद आश्रय गृह बेस्ड रासायन मॉडल पर रियॉ
अदालत ने कहा कि केवल बंद नमूनों में रखे गए रेखाचित्र मॉडल हमेशा के लिए प्रभावशाली नहीं होते हैं और अधिक कंकाल और पीड़ित-दर्शक विकल्प विकसित किए जाने चाहिए।
वैधानिक यौन शिक्षा का अधिकार
कोर्ट ने कहा कि वयस्कों को यौन उत्पीड़न के मामलों पर विचार नहीं करना चाहिए।
बाल बॅाडेलिटी की परिभाषा
कोर्ट ने इस बात पर हस्ताक्षर किए कि भारतीय कानून में बाल मानक की वर्तमान परिभाषा पाल्मेरो कैटलॉग से पूरी तरह मेल नहीं है और इस पर आरोप लगाया जाना चाहिए।
व्यापक मानव विरोधी कानून
कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी प्रकार के मानव अधिकारों और शोषण को शामिल करने के लिए व्यापक कानून बनाने पर विचार करने का आग्रह किया।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में तीन माह के लिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन माह के लिए आवश्यक दोषी अधिकारियों की नियुक्ति, कल्याण शेयरों की अधिसूचना और अन्य शेयरधारकों की नियुक्ति की पुष्टि करने का आदेश दिया।
केस को असेंबली रिपोर्ट सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि मानव और वाणिज्यिक यौन शोषण केवल आपराधिक विषय नहीं है, बल्कि मानव गरिमा और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है। न्यायालय द्वारा तैयार ‘पीड़ित आरक्षण योजना’ के केंद्र में आबाद व्यवस्था को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।
मामला: प्रज्वला बनाम भारत संघ
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