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ऐतिहासिक यूएस क्लब गेट को सड़क निर्माण परियोजना के दौरान स्वतः स्मरणीय मामले में विध्वंस हुआ
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक यूएस क्लब गेट को सड़क निर्माण के दौरान गिराए जाने पर स्वत: ट्रांसफार्मर ले लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जवाब तलब किया है।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक यूएस क्लब गेट को सड़क निर्माण परियोजना के विध्वंस के दौरान स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू कॉग्निसेंस) में लिया है। कोर्ट ने इस कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जानकारी मांगी है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और गणतंत्र बिपिन चंद्र नेगी खण्डपीठ ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जनहित याचिका (पीआईएल) में कर मामले की सुनवाई शुरू की।
मीडिया रिपोर्ट्स के बाद कोर्ट ने स्वतः स्मारिका को लिया
केस तब कोर्ट के रिमोट में आया जब विभिन्न समाचारों में ऐतिहासिक अमेरिकी क्लब के प्रवेश द्वार को पूरी तरह से ध्वस्त करने की खबरें प्रकाशित हुईं।
वैभव पक्ष के कट्टरपंथियों देवेन खन्ना ने इन समाचार रिपोर्टों को अदालत के समक्ष पेश किया, जिसके बाद अदालत ने स्वतः नाम लेते हुए मुकदमा शुरू कर दिया।
केस का विवरण विवरण संख्या सीडब्ल्यूपीआईएल नंबर 58 ऑफ 2026 के रूप में पंजीकृत किया गया है। अगली सुनवाई 29 जुलाई 2026 को होगी।
राज्य सरकार नगर एवं निगम को नोटिस
उच्च न्यायालय ने लोक निर्माण विभाग हिमाचल प्रदेश (पीडब्ल्यूडी) सचिव एवं नगर निगम शिमला के आयुक्त को नोटिस जारी कर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भरने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने दोनों अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की बात कही है कि किस तरह से रिमांड में इस ऐतिहासिक संरचना का विध्वंस किया गया और इसके संरक्षण के लिए कोई वैकल्पिक उपाय नहीं किया गया।
“विरासत का अहम हिस्सा था गेट”
समीक्षा के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह गेट माउंट की ऐतिहासिक पहचान और औपनिवेशिक वास्तुकला का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
रिज क्षेत्र से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह संरचना लकड़ी और पत्थर की वास्तुकला से निर्मित थी और छत पर इसके स्लेट पत्थरों से निर्मित थी।
कोर्ट ने कहा कि इस तरह की संरचनाएं केवल भौतिक निर्माण नहीं हैं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं।
विखंडन पर कोर्ट की वोटिंग
खण्डपीठ ने इस बात पर कहा कि यदि सड़क निर्माण के लिए गेट को स्थापित करना भी आवश्यक था, तो अधिकारियों को उसके मूल स्वरूप और निर्माण सामग्री को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि गेट को उसके मूल वास्तुशिल्प डिजाइन और शैली में पुनर्निर्मित करने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने की टिप्पणी:
“विरासत संख्या के संरक्षण और पुनर्निर्माण की ताकत पर विचार किए बिना इस प्रकार को हटाया नहीं जा सकता।”
“ड्रास्टिक एक्शन” का कारण कोर्ट को पता है
हाई कोर्ट ने यह कार्रवाई की “ड्रास्टिक एक्शन” छात्र ने कहा कि उसे पता है कि प्रशासन ने ऐतिहासिक महत्व की इस संरचना को बचाने के लिए पर्याप्त प्रयास किए थे।
अदालत ने विशेष रूप से यह जांच की है कि सड़क निर्माण परियोजना के दौरान विरासत संरक्षण के सिद्धांतों का पालन किया गया था।
PWD एवं नगर निगम ने मांगा समय
श्रवण के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रणय प्रताप सिंह ने लोक निर्माण विभाग की ओर से नोटिस स्वीकार किया। जहां पर फंसे विवेक शर्मा ने नगर निगम की ओर से नोटिस प्राप्त किया।
दोनों ने अदालत से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
विरासत संरक्षण बनाम विकास का प्रश्न
यह मामला केवल एक गेट के विघटन तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास स्मारक एवं ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण के बीच बैलेंस के व्यापक प्रश्न भी सामने लाये हैं।
विशेषज्ञ का मानना है कि ऐतिहासिक शहरों में किसी भी विकास परियोजना को लागू करने के लिए समय विरासत संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि शहर की सांस्कृतिक पहचान अक्षुण्ण रह सके।
29 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
अब सभी की नजरें 29 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब राज्य सरकार और नगर निगम को अदालत के समक्ष पेश किया गया था, जिसमें कहा गया था कि ऐतिहासिक यूएस क्लब को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया था और इसके संरक्षण के लिए कोई वैकल्पिक योजना नहीं बनाई गई थी।
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