Legal News: एनईईटी-यूजी री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर एससीओ पर रोक, दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र के फैसले को सही ठहराया


पोस्ट दृश्य: 50

एल्गोरिदम पर आधारित अल्प रोक को सही

दिल्ली उच्च न्यायालय नीट-यूजी 2026 में आयोजित री-एग्जाम से पहले कोचिंग पर रोक को बरकरार रखते हुए कहा गया कि प्लेटफॉर्म की तकनीकी संरचना परीक्षा से जुड़ी फर्जी खबरें और विचारधारा को तेजी से फैलाने में सक्षम है। कोर्ट ने माना कि सरकार का कदम अनुपातिक और समयबद्ध था।

नई: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर रोक को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार के जजमेंट को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा कि टेलीग्राम की संरचना ऐसी है, जो अवैध सामग्री और परीक्षण से जुड़े फर्जी निवेशकों को तेजी से फैलाने में सक्षम है और पहले अपनाए गए सीमित उपाय इस बाधा को रोकने में विफल रहे थे।

जस्टिस तेजस करिया टेलीग्राम एफजेड एलएलसी (टेलीग्राम एफजेड एलएलसी) की याचिका खारिज कर दी गई जिसमें कहा गया है कि प्लेटफॉर्म की तकनीकी विशेषताएँ, धोखाधड़ी और गलत सिलिकॉन के प्रसार के लिए विशेष रूप से संदेशवाहक हैं।

तार की तकनीकी संरचना पर न्यायालय की चिंता

कोर्ट ने कहा कि बड़े सार्वजनिक चैनल, क्लाउड आधारित स्टोरेज, व्यापक बॉट नेटवर्क, यूनिवर्सल नाम आधारित ऑपरेशन, मिरर चैनल और संदेश एडिट करने की सुविधा जैसे टेलीग्राम के गलत इस्तेमाल के लिए उपयुक्त संरचनाएं हैं।

कोर्ट ने कहा कि किसी भी विशेष चैनल को हटाने के बाद भी मिरर और सब्सक्राइबर्स के स्पीड से मैसाचुसेट्स के कारण वीएवी एलेडियो लगभग तुरंत फिर से शुरू हो जाते हैं।

टेलिकॉम एडिट फीचर से फ़ोर्ड पेपर लाइक का क्रोमा डेमोक्रेसी का संकट

कोर्ट ने यह भी माना कि इस ब्लॉग को संपादित करने की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि परीक्षा प्रश्नपत्र पहले ही लाइक हो चुके थे। इससे छात्रों और आम जनता को अनारक्षित किया जा सकता है और परीक्षण प्रक्रिया पर विश्वास मत हासिल किया जा सकता है।

चैनल हटाना जैसे उपाय नाकाफ़ी साबित हुए

कोर्ट ने कहा कि सरकार यह साबित करने में सफल रही है कि चैनल्स, बॉट्स और अकाउंट्स को “एंटी-स्पेसिफिक” उपाय के रूप में हटाना प्रभावशाली नहीं है। प्रतिबंधित चैनल के चैनल और दर्शकों के बीच बार-बार एनीमेशन सक्रिय हो रहे थे।

पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने की शक्ति सरकार के पास

तारकोल ने तर्क दिया था कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत सरकार पूरे मंच को ब्लॉक नहीं कर सकती। इस डीजल को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिनियम में “सूचना” शब्द का व्यापक अर्थ है, जिसमें सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर प्रोग्राम और मशीनें भी शामिल हैं।

इसलिए विशेष पोलैंड में केंद्र सरकार के पास पूरे मंच तक पहुंच का अधिकार है।

आपातकालीन आदेश में पर्याप्त कारण मौजूद है

जस्टिस करिया ने कहा कि आपातकालीन ब्लॉकिंग ऑर्डर बिना विचार किए पारित नहीं किया गया था। सरकार द्वारा दर्ज कारण प्राधिकरण थे और वे धारा 69ए और ब्लॉकिंग के तहत निर्धारित कानूनी मानक थे।

अदालत का मानना ​​था कि सार्वजनिक व्यवस्था और परीक्षा से जुड़े धार्मिक तत्वों पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता थी।

22 लाख छात्रों के हित में देशव्यापी

कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस लापरवाही को स्वीकार करते हुए कहा कि लगभग 22 लाख नीट अभ्यर्थियों का हित और पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए तत्काल हस्तक्षेप जरूरी था।

अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए), गृह मंत्रालय और भारतीय साइबर सहयोग केंद्र (आई4सी) की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि बार-बार चेतावनी और सामग्री निकालने के बावजूद टेलीग्राम का मिथक जारी किया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय के ‘अनुराधा भसीन’ के फैसले के सिद्धांतों का पालन

उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के अनुराधा भसीन जजमेंट में निर्धारित अनुपातिकता (आनुपातिकता) के सिद्धांतों को लागू करते हुए कहा गया है कि 22 जून 2026 तक लॉजिक रोक लगाई गई और 30 जून तक तकनीकी संपादन सुविधाओं को सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य से जुड़े कदम बताए गए हैं।

कोर्ट ने कहा-

“टेलीग्राम पर रोक केवल 22 जून, 2026 तक प्रभावी है, जबकि संदेश एडिट फीचर को 30 जून, 2026 तक हटा दिया गया है। मॉस्को में इस अवधि को सीमित कर दिया गया है, लेकिन केवल घोषित उद्देश्य की मंजूरी के लिए आवश्यक समय तक ही इसे लागू किया गया है।”

‘सबसे कम प्रतिबंधात्मक उपाय’ था सरकार का कदम

अंत में न्यायालय ने कहा कि सरकार का कदम अनुपातिकता के सभी मानकों पर खरा उतरता है और परीक्षण में धोखाधड़ी निषेध, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और परीक्षण प्रक्रिया में विश्वास सम्मिलित रखना शामिल है। “सबसे कम प्रतिबंधात्मक उपाय” (Least Restrictiveume) था.

इसी आधार पर कोर्ट ने टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी।

मामला : टेलीग्राम एफजेड एलएलसी बनाम भारत संघ एवं अन्य, दिल्ली उच्च न्यायालय, 2026

#दिल्लीहाईकोर्ट #टेलीग्राम #NEETUG2026 #NEETReExam #Section69A #ITAct #JusticeTejasKaria #NTA #CyberCrime #FakeNews #TelegramBan #LegalNews #delhiHC #NEETPaperLeak #HighCourt #दिल्लीहाईकोर्ट #टेलीग्राम #नीटूजी #पेपरलिक #कानूनीसमाचार #साइबरक्राइम #आईटीएक्ट #नीट2026



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *