पकड़ौआ ब्याह रद्द करने के पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, 7 फेरे के बिना अमान्य हुई थी शादी

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बिहार में पकड़ौआ विवाह की पुरानी परंपरा है. कभी लड़के को किडनैप करके जबरन कराई जाने वाली ऐसी शादियां धड़ल्ले से होती थीं जो समय कम हो गईं लेकिन अभी भी खत्म नहीं हुई हैं.

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने इसके साथ ही मामले में संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. उच्चतम न्यायालय ने दुल्हन की अपील पर यह अंतरिम आदेश दिया.

पटना हाईकोर्ट ने एक शादी को इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि दूल्हे को बंदूक की नोक पर शादी करने के लिए मजबूर किया गया था और सात फेरे भी नहीं लिए गए थे.

हाल ही पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने पकड़ौआ विवाह से जुड़े मामले में एक फैसला सुनाया था. उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोक लगा दी है. पटना हाईकोर्ट ने एक शादी को इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि दूल्हे को बंदूक की नोक पर शादी करने के लिए मजबूर किया गया था और सात फेरे भी नहीं लिए गए थे जोकि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत जरूरी है.

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में नोटिस जारी किया.

सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ौआ विवाह के मामले में पटना हाईकोर्ट के अहम फैसले पर रोक लगा दी है. पटना हाई कोर्ट ने अग्नि के समक्ष सात फेरे पूरे नहीं होने के आधार पर शादी को कानूनी तौर पर अमान्य कर दिया था. उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दुल्हन की अपील पर यह अंतरिम आदेश दिया है. बिहार में पकड़ौआ विवाह की पुरानी परंपरा है. कभी लड़के को किडनैप करके जबरन कराई जाने वाली ऐसी शादियां धड़ल्ले से होती थीं जो समय कम हो गईं लेकिन अभी भी खत्म नहीं हुई हैं. पिछले दिनों वैशाली में एक बीपीएससी शिक्षक को स्कूल से उठाकर शादी कर देने मामला सामने आया जो सुर्खियों में रहा.

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क्या है पूरा मामला?

करीब 10 साल पहले की बात है. यह मामला नवादा जिले का है. रेवरा गांव के चंद्रमौलेश्वर सिंह के बेटे रविकांत और लखीसराय ज़िले के चौकी गांव के बिपिन सिंह की बेटी बंदना कुमारी की दस साल पहले शादी कराई गई थी. रविकांत ने आरोप लगाया कि उसका पकड़ौआ विवाह हुआ था. यह घटना 30 जून 2013 की है। उसे मंदिर से अगवा किया गया और शादी करा दी गयी जो उसके परिवार को भी मंजूर नहीं है.

दरअसल रविकांत भारतीय सेना में जवान है. वह लखीसराय के एक मंदिर में अपने चाचा सत्येंद्र सिंह के साथ दर्शन करने गया था तभी लड़की वालों ने उसका अपहरण कर लिया. करीब आठ लोग उसे घसीटते हुए ले गए और बंदूक की नोक पर जबरन शादी करवा दी. शादी की सारी रस्में पूरी ही होने वाली थीं कि रविकांत वहां से भाग निकला. वह शौच के बहाने निकला और वहीं खड़ी एक बाइक से फरार हो गया और जम्मू-कश्मीर ड्यूटी पर चला गया. उसके पिता चंद्रमौलेश्वर सिंह ने कभी इस शादी को स्वीकार नहीं किया. रविकांत जब छुट्टी पर दोबारा घर आया तो उसने नवादा की फैमिली कोर्ट में लड़की के परिवार वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. साथ ही उसने शादी को रद्द करने की मांग की. निचली अदालत से जब याचिका खारिज हो गई तो रविकांत ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अब पटना हाईकोर्ट ने रविकांत को राहत देते हुए उसकी जबरन हुई शादी को रद्द करने का फैसला सुनाया है. पटना हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को एक “जबरन” विवाह को रद्द कर दिया.

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा था, “हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के अवलोकन से ये स्पष्ट है कि सातवां कदम (दूल्हा और दुल्हन द्वारा पवित्र अग्नि के चारों ओर) उठाने पर विवाह पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है.”

हाईकोर्ट ने ये भी कहा था-

“अगर ‘सप्तपदी’ पूरी नहीं हुई है, तो विवाह पूर्ण नहीं माना जाएगा.”

रवि के चाचा ने जिला पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, जिसने कथित तौर पर उनकी सुनवाई नहीं की. इसके बाद, रवि ने लखीसराय में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष एक आपराधिक शिकायत दर्ज की.

उन्होंने शादी को रद्द करने के लिए फैमिली कोर्ट का भी रुख किया, जिसने 27 जनवरी, 2020 को उसकी याचिका खारिज कर दी.

लड़की का क्या था दावा-

प्रस्तुत मामले में लड़की वंदना कुमारी का कहना है कि 2017 में लड़के रविकांत की दूसरी शादी करा दी गई. देवघर में उसने केस कर रखा है. लड़की ने यह भी दावा किया है कि लड़का उसका रिश्तेदार है. रविकांत उसकी एक बहन का देवर है जो अक्सर उसके घर आता-जाता था. लड़की ने यह भी कहा है कि लड़के ने अपनी मर्जी से हंसते हुए शादी की थी. लेकिन उसके परिवार वालों को शादी मंजूर नहीं हुआ तो वह बदल गया. लड़की ने ससुराल में प्रताड़ित किये जाने का भी दावा किया. कहा कि कुछ दिन ससुराल में भी रही लेकिन तंग किया जाता था इसलिए वापस मायके आना पड़ा. उसके वकील ने सारे सबूत रहते हाईकोर्ट में पेश नहीं किया जिसकी वजह से फैसला कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. उसने सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई है.

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उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि फैमिली कोर्ट का फैसला त्रुटिपूर्ण था और आश्चर्य व्यक्त किया कि प्रतिवादी की ओर से साक्ष्य देने वाले पुजारी को न तो ‘सप्तपदी’ के बारे में कोई जानकारी थी, न ही वो उस स्थान को याद करने में सक्षम थे जहां विवाह समारोह हुआ था. इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने जबरदस्ती कराई गई शादी को रद्द करा दी.

अस्तु सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगी दी है.

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