किसानों के पक्ष में उतरीं 11 अन्य पार्टियां, 10 ट्रेड यूनियन का भी समर्थन

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 एक तरफ किसान तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी के सवाल पर सरकार से ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब चाहते हैं और वो इससे कम पर आंदोलन खत्म करने को बिल्कुल भी राजी नहीं हैं तो दूसरी तरफ सरकार बीच का रास्ता निकालने का ऑफर दे रही है। सरकार की मंशा नए कानूनों को वापस लेने की तो बिल्कुल नहीं दिख रही है। इसकी पुष्टि रविवार को केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के एक बयान से भी होती है। उन्होंने साफ कहा कि कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो तीनों कानून लाए हैं, वो किसानों के हित में हैं। कैलाश चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार प्रदर्शनकारी किसानों की मांग के अनुसार इन कानूनों में कुछ संशोधन कर देगी। उन्होंने कहा, ‘ये कानून किसानों को आजादी देंगे। हमने हमेशा कहा कि किसानों को अपनी मर्जी से फसल बेचने का अधिकार होना चाहिए।

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में भी यही सिफारिश की गई है। मुझे नहीं लगता है कि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। अगर जरूरत पड़ी तो इनमें कुछ संशोधन किए जा सकते हैं ताकि आंदोलनकारी किसानों को मनाया जा सके। कैलाश चौधरी ने कहा कि सरकार लिखित में दे सकती है कि न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य बरकरार रखा जाएगा। हालांकि चौधरी ने किसान आंदोलन को डिसक्रेडिट करते हुए यह भी कह दिया कि उन्‍हें नहीं लगता कि ये असली किसान हैं। चौधरी ने कहा, ‘मैं नहीं मानता कि असली किसान, जो अपने खेतों में काम कर रहे हैं, वे इस बारे में चिंतित हैं।’ उन्‍होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डालने की कोशिश कर रहे हैं और देश के किसान नए कानूनों के समर्थन में हैं।

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भारत बंद पर अड़े किसानों को राजनीतिक दलों और यूनियनों का समर्थन हैं. उधर किसान 8 दिसंबर को ‘भारत बंद’ पर अड़े हुए हैं। इस बंद को 11 राजनीतिक दलों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह 8 दिसंबर को भारत बंद का समर्थन करेगी। 

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