सुप्रीम कोर्ट प्रदूषण मामले में सख्त, कहा कि हम लोगो को इस कदर मरने नहीं दे सकते, पंजाब और दिल्ली सरकार शीघ्र ही कुछ करें-

Estimated read time 1 min read

प्रदूषण बढ़ाने में पराली जलाने की भूमिका पर सर्वोच्च अदालत ने पंजाब सरकार से सवाल करते हुए कहा कि राज्य सरकार आखिर किसानों के संगठन से बात क्यों नहीं करती? उनका संगठन बेहद एक्टिव है. राज्य सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए और प्रदूषण कम होना ही चाहिए. कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण कैसे कम होगा ये राज्य सरकारें तय करें.

हमे समाधान चाहिए – सर्वोच्च अदालत

इस दौरान एमाइकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने बताया कि फार्म बर्निंग से कुल प्रदूषण में 24 फीसद योगदान है. इसके अलावा कोयला और फ्लाई ऐश से 17 फीसद और वाहनों से 16 फीसद प्रदूषण रिकॉर्ड किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम प्रदूषण के स्रोत क्या हैं इस को पूरी तरह से जानते है लेकिन सभी कोर्ट के व्हिप का इंतजार करते हैं. हमारे पास हर समस्या का समाधान है पर कोई कुछ नहीं कर रहा है.

कोर्ट ही कहा कि हम नतीजे चाहते हैं. हम विशेषज्ञ नहीं हैं लेकिन हम समाधान चाहते हैं. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, आज दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति DPCC के अध्यक्ष कोर्ट में पेश हुए. DPCC के वकील ने कोर्ट को बताया ‘स्मॉग टावर experimental basis पर शुरू किए गए थे.जून से सितंबर/अक्टूबर तक स्मॉग टावर को बंद करना होता है. बारिश के मौसम में इसे चालू रहने नहीं दिया जा सकता. इसके बाद मौसम अचानक से बदला है.’

आप किसानों को करें प्रोत्साहित-

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि हर साल ऐसा होता है. छह साल से हर कोई इससे जूझ रहा है. डेटा प्रोसेसिंग महत्वपूर्ण काम था. एमाइकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि अब डेटा वेबसाइट पर आ गया है. डेटा काफी हद तक समान है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सिर्फ उपायों को ग्राउंड लेवल पर लागू करना चाहते हैं. न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि पराली जलाने की एक बड़ी वजह पंजाब में धान की खास किस्म की खेती होना है. अदालत का जोर था की किसानों को दूसरी फसलों के लिए प्रोत्साहित करने की ज़रूरत है और फिर भी पराली जलाने पर रोक ज़रुरी है.

ALSO READ -  अगर ऐसे ही अल्पसंख्यक का दर्जा देते रहे तो उस स्थिति में देश सिर्फ अल्पसंख्यकों का ही होगा, सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की याचिका-

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया, ‘पराली जलाने पर रोक कैसे लगे कैसे मॉनिटर करे ये जरूरी है. एफआइआर रजिस्टर करना समस्या का समाधान नहीं है. अगर आप चाहें तो ये कर सकते है कि अगर कोई पराली जलता है तो उसे सब्सिडी नहीं मिलेगी. सभी राज्य सरकार जिम्मेदार हैं. आप सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिव है और अगर समस्या का समाधान नहीं निकलता है तो इनको यही बैठा लेंगे जब तक समस्या का समाधान नहीं निकलता.’

अदालत का ऑड-ईवन को लेकर सवाल-

सुप्रीम कोर्ट ने एमाइकस क्यूरी के बयान को कोट करते हुए ऑड-ईवन पर फिर सवाल उठाए और कहा कि इस स्कीम से फायदा नही होगा. दिल्ली सरकार ने दो रिसर्च सुप्रीम कोर्ट से साझा करते हुए कहा कि इससे इस स्कीम के जरिए फायदा होगा. कोर्ट ने कहा कि आपको जो करना है आप करें. कल को आप कहेंगे की सुप्रीम कोर्ट ने करने नही दिया. हम बस ये कहना चाहते है की ये असर हो रहा है स्कीम का. आप अपना फैसला लीजिए. इसमें हम कुछ नहीं कह रहे है. हमें लोगों के स्वास्थ्य की चिंता है. हर किसी के पास दो कार तो नही होगीं, लेकिन अगर स्कूटर है तो उस पर लागू नहीं होगा. आपको जो करना है आप करें.

एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि फार्म फायर तेजी से बढ़ रहा है और इसकी वजह से पंजाब में हर जगह लाल दिख रहा हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने पर रोक लगानी होगी. ये राज्य सरकार द्वारा करना होगा. कोई भी कैसे किसी दूसरे विकल्प पर जायेगा जब तक उसे सुविधा न दी जाए. विकास सिंह ने कहा 80 फीसदी मशीनों सब्सिडी है लेकिन उसके बाद भी किसान उसे नही ले रहे है.

You May Also Like